दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से सतसंग कार्यक्रम का आयोजन किया

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जालंधर (रमेश गाबा)- दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से जालंधर बाई पास रोड स्थित विधिपुर आश्रम में सतसंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उपस्थित श्रद्धालुगणों को संबोधित करते हुए संस्थान के प्रवक्ता श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य गुरू भाई शूरबीर जी ने कहा कि आज की इस आधुनिक जीवनशैली में अक्सरां देखा जाता है कि लोग नियमों में बंधना पसंद नहीं करते हैं। फि र चाहे वे नियम उनके व्यावासिक, सामाजिक या व्यक्तिगत जीवन से स•बन्धित क्यों न हो। उनके हिसाब से नियम स्वंय के फ्र ीडम ज़ोन में दखल पैदा करते है। परन्तु वास्तविकता में नियमबद्ध जीवन ही सफ लता की कुंजी होता है। एक सुदृढ़ समाज का निर्माण भी नियमों के पालन से ही पूरा होता है। अगर समाज में कोई नियम ही न हो, प्रत्येक व्यक्ति को मनचाहा कर्म करने की स्वतंत्रता हो तो उस समाज में केवल अव्यवस्था, अन्याय, अत्याचार, अनुचित व अर्थहीन व्यवहार की ही झलक दिखेगी। कहते है कि जब रूस को आज़ादी प्राप्त हुई तब एक व्यक्ति सड़क के बीचों बीच चल रहा था। तभी एक ट्रैफि क पुलिसमैन की नज़र उस व्यक्ति पर पड़ गई। उसने उसको सड़क के किनारे पर चलने की सलाह दी। उत्तर स्वरूप उस व्यक्ति ने कहा रूस आजाद है, मैं भी आज़ाद हूँ। जहाँ मेरा मन चाहेगा मैं वहीं चलूँगा। प्रत्युत्तर में टैफि क पुलिस ने भी कह दिया- हाँ रूस आज़ाद है। तो फि र ड्राइवर भी आज़ाद है। वह भी मनचाही ड्राइविंग कर सकता है। और अगर ऐसा होता है तो वह ड्राइवर जेल में होगा और तुम कब्र में। अत: जब कोई नियम के विरूद्ध जाता है तब वह स्वार्थी होकर स्वंय को ही नही बल्कि समूचे समाज को नुकसान पहुँचाता है। यदि हम बात करें गुरू शिष्य के सर्वोत्तम स•बन्ध की तो यहाँ भी नियमों का विशिष्ट स्थान है। गुरूदेव की आज्ञाएँ शिष्य के लिए नियम समान होती है। ये आज्ञा रूपी नियम कठोर अवश्य लगते हैं। कभी कभी तो निज़ी आज़ादी के अवरोधक भी, पर यह सर्वविदित है कि जो नदी स्वंय को बाँध के समक्ष समर्पित कर देती है वही सयंमित होकर विद्युत उत्पन्न करने में भी सक्षम हो पाती है। लाखों करोड़ों लोगों के जीवन को रोशन करने का एक सशक्त माध्यम बन जाती है। ठीक उसी प्रकार जब एक शिष्य गुरू आज्ञाा के बाँध में बँध जाता है उसका शिष्यत्व तो उत्कृष्टता को प्राप्त होता ही है। साथ ही वह अपने श्रेष्ठ आचरण और व्यक्तित्व से विश्व पटल पर एक ऐसी अनूठी छाप छोड़ता है जो आने वाली अनेक पीढिय़ों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन जाती है।

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